उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nigah-e-dost sawal-o-jawab mat karna

निगाह-ए-दोस्त सवाल-ओ-जवाब मत करना

نگاہ دوست سوال و جواب مت کرنا

शायर: G R Kanwal9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निगाह-ए-दोस्त सवाल-ओ-जवाब मत करना
मैं बे-हिसाब हूँ मुझ से हिसाब मत करना

मुझे ख़ुदा ने छुपाया है लाख पर्दों में
जो हो सके तो मुझे बे-हिजाब मत करना

नक़ाब-पोशी में ये दिल है इक दुल्हन की तरह
किसी जगह भी इसे बे-नक़ाब मत करना

मैं ज़िंदगी के सफ़र का हसीन आदम हूँ
मुझे सँभाल के रखना ख़राब मत करना

मुझे सुकून मिलेगा तो सिर्फ़ पानी से
सो मेरी प्यास को वक़्फ़-ए-शराब मत करना

मैं ख़ुद सवाल हूँ अपने ख़मोश होंटों पर
सवाल कर के मुझे लाजवाब मत करना

ये ज़िंदगी है मुकम्मल हर एक चीज़ के साथ
किसी भी शय का यहाँ इंतिख़ाब मत करना

जो कामयाब है वो आरज़ू से ख़ाली है
तिरे निसार मुझे कामयाब मत करना

बड़ा मज़ा है 'कँवल' रूह को जगाने में
तुम अपनी ज़ात को अब महव-ए-ख़्वाब मत करना