उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar paDe to ghazal ke mizaj-danon ki

नज़र पड़े तो ग़ज़ल के मिज़ाज-दानों की

نظر پڑے تو غزل کے مزاج دانوں کی

शायर: Qaisarul Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र पड़े तो ग़ज़ल के मिज़ाज-दानों की
हमारे शेर अमानत हैं आसमानों की

हवा चले न चले लोग इंतिज़ार में हैं
खुली हुई हैं अभी खिड़कियाँ मकानों की

तिरे ख़ुलूस को अब क्या करूँ किनारे पर
समुंदरों में ज़रूरत थी बादबानों की

हज़ार ज़ख़्म पुराने हज़ार ज़ख़्म नए
मिरे बदन पे नज़र थी कई ज़मानों की

फिर इस के बा'द क़सीदा बहार का लिखना
उठा के राख तो फेंक आओ आशियानों की

ज़मीन पाँव की ज़ंजीर बन नहीं सकती
थकन मिटे तो वही रुत है फिर उड़ानों की

हमारे घर के उजाले कहाँ गए 'क़ैसर'
सिसक रही हैं लवें अब भी शम्अ-दानों की