उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar nazar se mili dil pukar uTha ki nahin

नज़र नज़र से मिली दिल पुकार उठा कि नहीं

نظر نظر سے ملی دل پکار اٹھا کہ نہیں

शायर: Ghalib Ahmad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र नज़र से मिली दिल पुकार उठा कि नहीं
नहीं ख़बर मुझे उस वक़्त होश था कि नहीं

फिर आरज़ूओं की बस्ती में क़ाफ़िले आए
दर-ए-फ़ुसून-ए-तमन्ना अभी खुला कि नहीं

नए सफ़र हैं नए राह-रौ नई राहें
नए ज़मीन-ओ-ज़माँ की है इब्तिदा कि नहीं

तिरी तलाश में हम ख़ुद से आश्ना न रहे
अभी हुई है मोहब्बत की इंतिहा कि नहीं

तिरे विसाल के रस्तों में हम ख़िरद से मिले
जुनूँ ने दिल से कहा है वही फ़ज़ा कि नहीं