उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya kare haal-e-dil bayan koi

क्या करे हाल-ए-दिल बयाँ कोई

کیا کرے حال دل بیاں کوئی

शायर: Ghalib Ahmad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या करे हाल-ए-दिल बयाँ कोई
न रहा ज़ेब-ए-दास्ताँ कोई

फिर है क़ल्ब-ओ-नज़र में यकसूई
काश आ जाए ना-गहाँ कोई

आँख शबनम की देखती है किसे
चाँदनी में हुआ जवाँ कोई

शहर से दूर दिन का फूल खिला
दश्त में भी है गुलसिताँ कोई

दिल भी हमराज़-ए-आरज़ू निकला
अब नहीं अपना राज़-दाँ कोई

छोड़ दुख-सुख की मंज़िलों का तवाफ़
दिल मियाँ ढूँड आस्ताँ कोई

दूर अपनों से हो रहे हैं लोग
देखिए कब मिले कहाँ कोई