उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ahd-e-ghazab hai shor bahut qil-o-qal ka

अह्द-ए-ग़ज़ब है शोर बहुत क़ील-ओ-क़ाल का

عہد غضب ہے شور بہت قیل و قال کا

शायर: Ghalib Ahmad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अह्द-ए-ग़ज़ब है शोर बहुत क़ील-ओ-क़ाल का
ये दौर है बहा-ए-अदब के ज़वाल का

ग़ारों में छुप के सो रहो ऐ सकिनान-ए-दिल
सदियों तलक न आएगा झोंका ख़याल का

वीरान अपने हाथ से की कार-गाह-ए-ज़ीस्त
ज़र्रे से ख़ूब काम लिया है कमाल का

आए थे इस ज़मीन पे जाएँगे अब कहाँ
देगा जवाब कौन हमें इस सवाल का

ये सई-ए-राएगाँ तो न थी अपनी जुस्तुजू
ऐ ज़ुल-जलाल हम को दिखा रुख़ जमाल का

बैठे हैं सौ बरस से तिरे इंतिज़ार में
आओ भी अब तो फ़ासला है एक साल का