उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne ghar se mere ghar tak kuchh lamhon mein aaega

अपने घर से मेरे घर तक कुछ लम्हों में आएगा

اپنے گھر سے میرے گھر تک کچھ لمحوں میں آئے گا

शायर: Ghalib Ahmad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने घर से मेरे घर तक कुछ लम्हों में आएगा
इतनी मसाफ़त में लोगों को कितने रंग दिखाएगा

धूप थी सरसों की क्यारी में दोनों मिल कर सोए थे
ये मंज़र भी साथ हमारे दर दर ठोकर खाएगा

फिर वो शाइ'र रात गए उस शहर में तन्हा फिरता है
उस को कहना सब्र करे मिलने का मौसम आएगा

सारी रात वो साथ रहे साए की तरह हम से दूर
हम भी साथ लगे रहते हैं कभी तो मिल ही जाएगा

रात की काली चादर ले कर दिन भर सोए रहते हैं
देखें कब वो सूरज बन कर हमें जगाने आएगा