उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar nazar se milai kyon thi nafas nafas mein samae kyon the

नज़र नज़र से मिलाई क्यों थी नफ़स नफ़स में समाए क्यों थे

نظر نظر سے ملائی کیوں تھی نفس نفس میں سمائے کیوں تھے

शायर: Kaif Moradaabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र नज़र से मिलाई क्यों थी नफ़स नफ़स में समाए क्यों थे
उन्हें था मंज़ूर मुझ से पर्दा तो सामने मेरे आए क्यों थे

दयार-ए-हुस्न-ए-वफ़ा-तलब की तरफ़ क़दम ही उठाए क्यों थे
जुनूँ को इल्ज़ाम देने वाले जुनूँ की बातों में आए क्यों थे

इसी ख़ता की सज़ा में अब तक निशान-ए-मंज़िल नहीं मिला है
रह-ए-मोहब्बत में अव्वल अव्वल मिरे क़दम डगमगाए क्यों थे

वो आफ़्ताब-ए-जमाल शायद यहीं कहीं से गुज़र रहा है
जहान-ए-दिल के तमाम ज़र्रे अभी अभी जगमगाए क्यों थे

नफ़स नफ़स सद-ख़लिश बद-आमाल क़दम क़दम पर हज़ार तूफ़ाँ
मैं अब ये समझा कि रोज़-ए-अव्वल वो देख कर मुस्कुराए क्यों थे

उन्हें जो अब 'कैफ़' से है शिकवा कि नज़्म-ए-आलम बिगाड़ डाला
वो ऐसे दीवाने को भला इस ख़िरद की दुनिया में लाए क्यों थे