उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar mein ek bhi chehra nahin charaghon ka

नज़र में एक भी चेहरा नहीं चराग़ों का

نظر میں ایک بھی چہرہ نہیں چراغوں کا

शायर: Aabid Jafri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र में एक भी चेहरा नहीं चराग़ों का
ग़ुबार है मिरी आँखों में किन उजालों का

चटान है तिरा पैकर तो आँख नम क्यों है
जवाब ढूँढता रहता हूँ इन सवालों का

फ़ज़ा में आँधियाँ इस ज़ोर से चली हैं कि अब
परिंद भूल गए रास्ता उड़ानों का

है आज भी मिरे पहलू में इक अजीब ख़लिश
ये इकतिसाब-ए-करम है तुम्हारी बाँहों का