उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar aate hain wo hum ko KHafa se

नज़र आते हैं वो हम को ख़फ़ा से

نظر آتے ہیں وہ ہم کو خفا سے

शायर: Ubaid Najibabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र आते हैं वो हम को ख़फ़ा से
मरज़ अच्छा न होगा ये दवा से

जवाब अब देते हैं दादा को पोते
दिए डरते नहीं हैं अब हवा से

भुला बैठा है सब अच्छाई मेरी
ग़लत अल्फ़ाज़ क्या निकले ज़रा से

मैं उस को धोका देना चाहता हूँ
मिरा दिल भर गया है अब वफ़ा से

मुझे जीने की अब हसरत नहीं है
मुझे आज़ाद कर दो इस सज़ा से

कोई जाता नहीं मस्जिद की जानिब
ख़ुदा रूठा है या बंदे ख़ुदा से