उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naya adab nae aadab kaun dekhega

नया अदब नए आदाब कौन देखेगा

نیا ادب نئے آداب کون دیکھے گا

शायर: Faiz Khalilabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नया अदब नए आदाब कौन देखेगा
हमारा हल्क़ा-ए-अहबाब कौन देखेगा

मैं इस ख़याल से दो-चार हूँ कई दिन से
तुम्हारे बाद मिरे ख़्वाब कौन देखेगा

तुम्हारे हाथों परोसा गया मोहब्बत से
वो जाम-ए-जम है कि तेज़ाब कौन देखेगा

तुम्हारे बनने की सब लोग दाद देंगे मगर
मिरे बिगड़ने के अस्बाब कौन देखेगा

यहाँ सभी हैं तिरे झील से बदन के मुरीद
हमारी रूह का तालाब कौन देखेगा

मसर्रतों के चराग़ों में नूर है जब तक
किसी उदासी का मेहराब कौन देखेगा