उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek karwaT bhi agar sote to nind aa jati

एक करवट भी अगर सोते तो नींद आ जाती

ایک کروٹ بھی اگر سوتے تو نیند آ جاتی

शायर: Faiz Khalilabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक करवट भी अगर सोते तो नींद आ जाती
ग़म मिरे साथ नहीं होते तो नींद आ जाती

धोका दे जातीं हमें ग़ैर-मुनासिब आँखें
हम अगर दिल से नहीं रोते तो नींद आ जाती

हम जुदाई के नहूसत-भरे पानी से अगर
अपनी आँखों को नहीं धोते तो नींद आ जाती

ज़ेहन से जिस को खुरचने में लगाई इक उम्र
हम अगर दिल से उसे खोते तो नींद आ जाती

बैठ कर शहर के फुट-पाथ पे हम सोचते हैं
घर के होते नहीं इकलौते तो नींद आ जाती

अपनी वहशत-ज़दा आँखों की ज़मीं पर हम लोग
ख़्वाब पेचीदा नहीं बोते तो नींद आ जाती

'फ़ैज़' दुनिया के जो अन-देखे जनाज़े हैं सभी
अपने काँधों पे न हम ढोते तो नींद आ जाती