उर्दू शायरी · ग़ज़ल

isi liye hamein ehsas-e-bewafai nahin

इसी लिए हमें एहसास-ए-बेवफ़ाई नहीं

اسی لئے ہمیں احساس بے وفائی نہیں

शायर: Faiz Khalilabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इसी लिए हमें एहसास-ए-बेवफ़ाई नहीं
हमारे पास हैं कंगन कोई कलाई नहीं

यही सबब है कि बे-रंग हो गए सब ख़्वाब
हमारी आँखों में काजल था रौशनाई नहीं

मोहब्बतों के सफ़र में मोहब्बतों के सिवा
हमारे पास कोई दूसरी कमाई नहीं

उस इक निगाह का तर्ज़-ए-बयान ऐसा था
किसी की बात हमारी समझ में आई नहीं

चमक है उस के हर इक मिस्रा-ए-बदन पे मगर
मिरी ग़ज़ल को कोई देता मुँह-दिखाई नहीं

हम अपने अह्द के सुक़रात हैं हमारे यहाँ
कोई भी गुफ़्तुगू होगी हवा-हवाई नहीं

वहाँ पहुँच के भी हासिल हुआ है 'फ़ैज़' मुझे
जहाँ किसी से मिरी कोई आश्नाई नहीं