उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat ban jae jo tafsil se baaten kar le

बात बन जाए जो तफ़्सील से बातें कर ले

بات بن جائے جو تفصیل سے باتیں کر لے

शायर: Faiz Khalilabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात बन जाए जो तफ़्सील से बातें कर ले
तिश्नगी मेरी अगर झील से बातें कर ले

जहाँ के गाँव से तारीकी निकल सकती है
दिल अगर फ़िक्र की क़िंदील से बातें कर ले

तू ख़रीदार मिरे दिल की ज़मीं का है ठहर
पहले दिल रूह की तहसील से बातें कर ले

का'बा-ए-दिल तुझे महफ़ूज़ अगर रखना है
जा के उल्फ़त की अबाबील से बातें कर ले

सिर्फ़ क़ुरआँ के 'अलावा है भला किस की मजाल
जो कि तौरात से इंजील से बातें कर ले

वो सुहूलत हमें गूगल ने फ़राहम की है
पल में इंसान ब्राज़ील से बातें कर ले

'आक़िबत अपनी बनानी है अगर 'फ़ैज़' तुझे
नफ़्स की उड़ती हुई चील से बातें कर ले