उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nashtar si dil mein chubhti hui baat le chalen

नश्तर सी दिल में चुभती हुई बात ले चलें

نشتر سی دل میں چبھتی ہوئی بات لے چلیں

शायर: Jafar Raza8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नश्तर सी दिल में चुभती हुई बात ले चलें
आए हैं तो ख़ुलूस की सौग़ात ले चलें

वीरानियों के घर में मिरा दम ही घुट न जाए
आ ऐ ख़याल-ए-यार तुझे साथ ले चलें

जब रौशनी थी चलता था साया भी साथ साथ
अब है अँधेरी रात किसे साथ ले चलें

जिस में उमीद-ओ-यास फ़रेब-ए-नज़र रही
इस हफ़्त-ख़्वान-ए-ग़म की रिवायात ले चलें

शम-ए-उमीद जिस में फ़रोज़ाँ न हो सकी
अब उस की बज़्म-ए-नाज़ में वो रात ले चलें

कुछ बेकसों के घर जले कुछ बे-दयार हैं
उन के हुज़ूर अश्कों की बरसात ले चलें

रंग-ए-शफ़क़ में ख़ून-ए-शहीदाँ है जल्वा-गर
अपने अज़ीम मुल्क की सौग़ात ले चलें

अपने नगर में बस यही किर्चें हैं हर तरफ़
कुछ गौहर-ए-तलाफ़ी-ए-माफ़ात ले चलें