उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hadis-e-ishq ko unwan la-jawab mila

हदीस-ए-इश्क़ को उन्वान ला-जवाब मिला

حدیث عشق کو عنوان لا جواب ملا

शायर: Jafar Raza9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हदीस-ए-इश्क़ को उन्वान ला-जवाब मिला
मुझे निगाह मिली है उसे शबाब मिला

हमें नसीब से क़ुरआन ला-जवाब मिला
वरक़ जहाँ से खुला ज़िंदगी का बाब मिला

ख़ुदा के फ़ज़्ल से जूया-ए-इल्म-ओ-दानिश को
नबी सा शहर मिला और अली सा बाब मिला

गुनाहगार हमीं थे तमाम ख़िल्क़त में
हमें को अशरफ़-ए-मख़्लूक़ का ख़िताब मिला

बस एक ख़्वाब की ता'बीर ढूँढते गुज़री
तमाम-उम्र का हासिल बस एक ख़्वाब मिला

झुकी झुकी सी निगाहों में इज़्तिराब निहाँ
न जाने कितने हिजाबों में बे-हिजाब मिला

जमाल-ए-यार की रानाइयों में आख़िर-ए-शब
कहीं ये काहकशाँ थी कहीं शहाब मिला

ज़मीन-ए-शेर हुई आफ़्ताब-ए-बुर्ज-ए-शरफ़
'अनीस' फ़न में तिरे लुत्फ़-ए-बू-तराब मिला

सुख़न समझते हैं 'जाफ़र'-रज़ा कई अहबाब
जो राह-ए-शौक़ में नग़्मात का सराब मिला