उर्दू शायरी · ग़ज़ल

naqab chehre se wo shoala-ru uTha leta

नक़ाब चेहरे से वो शो'ला-रू उठा लेता

نقاب چہرہ سے وہ شعلہ رو اٹھا لیتا

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नक़ाब चेहरे से वो शो'ला-रू उठा लेता
तो चश्म-ए-बद को मैं आँखों का तिल जला लेता

जो उस के ख़ाक-ए-कफ़-ए-पा भी मिलते हम-चश्मो
तो राह पर उसे मैं सुर्मा सा लगा लेता

जो इन लबों से न होता मुशाबह आब-ए-हयात
ख़िज़र न छोड़ सिकंदर को रास्ता लेता

हुए न थे जो अभी साफ़ पेच ज़ुल्फ़ों की
बला से पंजा-ए-मिज़्गाँ ही वो लड़ा लेता

जो मुझ से होते वो बे-पर्दा बद नज़र के लिए
नज़र की तरह से आँखों में मैं छुपा लेता