उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nairangi-e-bahaar-e-junun hum bhi dekh len

नैरंगी-ए-बहार-ए-जुनूँ हम भी देख लें

نیرنگیٔ بہار جنوں ہم بھی دیکھ لیں

शायर: Kailash Mahir9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नैरंगी-ए-बहार-ए-जुनूँ हम भी देख लें
क्या गुल खिलाए गिर्या-ए-शबनम भी देख लें

सुनते हैं वो है दुश्मन-ए-ईमान-ओ-आगही
मौज-ए-मय-ए-नशात का आलम भी देख लें

ले सर उठा रहे हैं तिरे आस्ताँ से हम
होता है कौन इश्क़ का महरम भी देख लें

शायद ग़म-ए-जहाँ के असीरों को रास आए
आशुफ़्तगी-ए-गेसू-ए-पुर-ख़म भी देख लें

पाला पड़ा है हुस्न-ए-तग़ाफ़ुल-शिआर से
ज़ब्त-ए-जुनून-ए-इश्क़ का दम-ख़म भी देख लें

आवारगी-ए-फ़स्ल-ए-चमन चार दिन सही
कुछ इर्तिबात-ए-शो'ला-ओ-शबनम भी देख लें

तेरे ख़याल ही से न हों राहतें तमाम
तुझ को भुला के इश्क़ का आलम भी देख लें

मुद्दत हुई कि आँख से टपका नहीं लहू
किस हाल में हैं अहल-ए-वफ़ा हम भी देख लें

वो जिन को ए'तिमाद-ए-ख़ुलूस-ए-वफ़ा नहीं
फ़ुर्क़त में चश्म-ए-नाज़ को पुर-नम भी देख लें