उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nai zamin naya aasman banana hai

नई ज़मीन नया आसमाँ बनाना है

نئی زمین نیا آسماں بنانا ہے

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नई ज़मीन नया आसमाँ बनाना है
तिरे मकान से बेहतर मकाँ बनाना है

जो बात सच है नहीं खोलनी ज़माने पर
तख़य्युलात को हुस्न-ए-बयाँ बनाना है

हवा से तेरी हिमायत में गुफ़्तुगू के बा'द
दिए की लौ को तिरा पासबाँ बनाना है

तलाश करने हैं कुछ अपने जैसे लोग मुझे
और एक हल्क़ा-ए-आवारगाँ बनाना है

सिपुर्द कर के किसी को मकान-ए-दिल 'शहज़ाद'
ख़ुद अपने-आप को बे-ख़ानुमाँ बनाना है