उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin sahi mere nalon mein kuchh asar na sahi

नहीं सही मिरे नालों में कुछ असर न सही

نہیں سہی مرے نالوں میں کچھ اثر نہ سہی

शायर: Ijtiba Rizvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं सही मिरे नालों में कुछ असर न सही
नज़र कुछ आप की बेचैन है इधर न सही

हम उलझनों में पड़े अक़्ल-ए-ना-रसा ले कर
वो ऐश-ए-बे-ख़बरी ख़ूब था ख़बर न सही

अदा-फ़रोशी-ए-बाज़ार-ए-तूर और हुज़ूर
ख़बर यही तो है मशहूर मो'तबर न सही

फ़िदा हो ताब-ए-बसारत मिरी बसीरत पर
नज़र ने चुन तो लिया ताक़त-ए-नज़र न सही

पुकारते हैं कि गूँज इस पुकार की रह जाए
दुआ दुआ तो कही जाएगी असर न सही

हुजूम-ए-बे-ख़बराँ है भरी तो है महफ़िल
तुम्हारी बज़्म में 'रिज़वी'-ए-बा-ख़बर न सही