उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nafrat ki siyasat aam hui iKHlas-o-mohabbat bhul gae

नफ़रत की सियासत 'आम हुई इख़्लास-ओ-मोहब्बत भूल गए

نفرت کی سیاست عام ہوئی اخلاص و محبت بھول گئے

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नफ़रत की सियासत 'आम हुई इख़्लास-ओ-मोहब्बत भूल गए
हम अपने बुज़ुर्गों की हिकमत पैग़ाम-ओ-नसीहत भूल गए

मज़हब के मक़ासिद इक जैसे अफ़्क़ार-ओ-‘अक़ाएद यक-रंगी
इक राह पे चलने वाले सब सदियों की रिफ़ाक़त भूल गए

ये मंदिर-ओ-मस्जिद के झगड़े ये शैख़-ओ-बरहमन के क़िस्से
सब फ़र्क़-ओ-ज़लालत याद मगर ईमाँ की हरारत भूल गए

'आशिक़ हैं रसूल-ए-रब के सभी हैं राम के दीवाने भी सभी
दोनों की क़यादत के हामी क्यों नक़्श-ए-क़यादत भूल गए

सावन के वो झूलों की शोहरत रमज़ान के रोज़ों की बरकत
होली की बहारों की हलचल 'ईदो की स'आदत भूल गए

हैं राम के ग़ाज़ी सैफ़-ब-कफ़ बे-कैफ़ नमाज़ी संग-ब-कफ़
दोनों हक़ के हामी लेकिन हक़ ही की हक़ीक़त भूल गए

सब जंगल काट दिए लेकिन ज़ेहनों से वो वहशी-पन न गया
आबाद हैं शहरों में लेकिन तहज़ीब-ओ-सक़ाफ़त भूल गए