उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nafrat hai harf-e-wasl se achchha yuhin sahi

नफ़रत है हर्फ़-ए-वस्ल से अच्छा यूहीं सही

نفرت ہے حرف وصل سے اچھا یوہیں سہی

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नफ़रत है हर्फ़-ए-वस्ल से अच्छा यूहीं सही
लो आओ और बात सुनो वो नहीं सही

छोड़ूँगा मैं न हाथ चले आओ साथ साथ
नाज़ुक कलाई दुखती है तो आस्तीं सही

मश्क-ए-जफ़ा के वास्ते किस की तलाश है
कोई अगर नहीं है तो ये कम-तरीं सही

इक़रार कर के घूरते हो क्यों मिरी तरफ़
बावर सही यक़ीन सही दिल-नशीं सही

बेदाद कर के चाहते हो फिर जफ़ा की दाद
बेहतर बजा दुरुस्त सहीह आफ़रीं सही

सज्दे ही करते जाएँगे हम तेरी राह में
है नक़्श-ए-पा से आर तो नक़्श-ए-जबीं सही

बे-दिल-लगी भी 'दाग़' गुज़रनी मुहाल है
वो दिल नहीं सही वो तमन्ना नहीं सही