उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nae andaz se didar kar lun phir chale jaana

नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जाना

نئے انداز سے دیدار کر لوں پھر چلے جانا

शायर: G R Kanwal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नए अंदाज़ से दीदार कर लूँ फिर चले जाना
मैं अपनी रूह को बेदार कर लूँ फिर चले जाना

हज़ारों ख़्वाब देखे थे मिरी मासूम आँखों ने
मैं उन का सरसरी इज़हार कर लूँ फिर चले जाना

हवस ने आज तक जो ऐश के पैकर बनाए हैं
उन्हें पूरी तरह मिस्मार कर लूँ फिर चले जाना

तुम्हारी दीद के जो मुंतज़िर थे एक मुद्दत से
मुज़य्यन वो दर-ओ-दीवार कर लूँ फिर चले जाना

वो जिन को थाम कर तुम ने मुझे जुम्बिश अता की थी
मैं इन हाथों से तुम को प्यार कर लूँ फिर चले जाना

वो जिस पर ठोकरें खा कर 'कँवल' से मिलने आए हो
वो रस्ता शौक़ का हमवार कर लूँ फिर चले जाना