उर्दू शायरी · ग़ज़ल

narawa sabt kiya kun ka ishaara kar ke

नारवा सब्त किया कुन का इशारा कर के

ناروا ثبت کیا کن کا اشارہ کر کے

शायर: Aamir Azher6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नारवा सब्त किया कुन का इशारा कर के
देखना है ये तमाशा भी दोबारा कर के

हक़-पसंदी ने कहाँ चैन दिलों को बख़्शा
लोग उम्मीद पे आए थे सहारा कर के

मस्लहत पा के मुअर्रिख़ ने किया दफ़्न उसे
लोग ख़ुश थे उन्हीं यादों पे गुज़ारा कर के

चंद ताजिर हैं कुछ 'आशिक़ हैं और इक दो शा'इर
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के

इक लक़ब दे के उसे नाम-ओ-निशाँ छीन लिया
'इश्क़ का क़ैस ने ये नक़्श उभारा कर के

कब लिखे से ही हुआ कोई किसी का 'आमिर'
आप ख़ुद के भी हुए ख़ुद को गवारा कर के