उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nam jis shai ka zindagani hai

नाम जिस शय का ज़िंदगानी है

نام جس شے کا زندگانی ہے

शायर: Zafar Mahmood zafar9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाम जिस शय का ज़िंदगानी है
कुछ हक़ीक़त है कुछ कहानी है

आप दीवाना कह रहे हैं मुझे
आप ही की तो मेहरबानी है

कल मुझे देख कर जो हँसते थे
उन की आँखों में आज पानी है

सारी दुनिया हसीन लगती है
हाए क्या चीज़ नौजवानी है

हम ब-ज़िद हैं कि उन को देखेंगे
उन के होंटों पे लन-तरानी है

यूँ नदी में जो तुम नहाते हो
आग पानी में क्या लगानी है

उन की ज़ुल्फ़ें हैं मेरे शानों पर
आज की शाम क्या सुहानी है

ज़ख़्म के फूल दर्द की शाख़ें
क्या वफ़ा की यही निशानी है

ये अक़ीदा है ऐ 'ज़फ़र' मेरा
शायरी दिल की तर्जुमानी है