उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nam bhi jis ka zaban par tha duaon ki tarah

नाम भी जिस का ज़बाँ पर था दुआओं की तरह

نام بھی جس کا زباں پر تھا دعاؤں کی طرح

शायर: Iftikhar Naseem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नाम भी जिस का ज़बाँ पर था दुआओं की तरह
वो मुझे मिलता रहा ना-आश्नाओं की तरह

आ कि तेरे मुंतज़िर हैं आज भी दीवार-ओ-दर
गूँजता है घर में सन्नाटा सदाओं की तरह

वो शजर जलता रहा ख़ुद किस कड़कती धूप में
जिस का साया था मिरे सर पर घटाओं की तरह

झुक रहे थे बाग़ के सब फूल उस के सामने
घास पर बैठा था वो फ़र्मां-रवाओं की तरह

मैं भला कैसे उसे इक अजनबी कह दूँ 'नसीम'
जिस ने देखा था पलट कर आश्नाओं की तरह