उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na-ehtiram ka bas ehtiram kar baiThe

ना-एहतिराम का बस एहतिराम कर बैठे

نا احترام کا بس احترام کر بیٹھے

शायर: Maaham Shah5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ना-एहतिराम का बस एहतिराम कर बैठे
हम अपने कर्ब का ख़ुद इंतिज़ाम कर बैठे

उन्हें तो आना ही कब था हमारी बस्ती में
हज़ार तरह के हम एहतिमाम कर बैठे

ये बे-रुख़ी का अजब सिलसिला तो तब से है
वो गुज़रे राह से और हम सलाम कर बैठे

ख़मोश तब्अ' थे दामन बचा के चल दिए वो
और हम नसीब के मारे कलाम कर बैठे

लगाओ आस ना उम्मीद रक्खो तुम 'माहम'
बुझाओ शम्अ' वो क़िस्सा तमाम कर बैठे