उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chhoD ummid use ab nahin aana shayad

छोड़ उम्मीद उसे अब नहीं आना शायद

چھوڑ امید اسے اب نہیں آنا شاید

शायर: Maaham Shah5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

छोड़ उम्मीद उसे अब नहीं आना शायद
आना भी है तो नहीं हम को बताना शायद

सब्र आया है हमें अश्क-फ़िशानी से ही
मिल ही जाए कोई उस को भी बहाना शायद

उस ने अच्छा ही किया बिन मुझे बतलाए गया
जान ले लेता मिरी उस का यूँ जाना शायद

उन का अपना भी जो जाएगा बिना बतलाए
तब इस एहसास को समझेगा ज़माना शायद

वो एक दिन आएगा दरिया के किनारे 'माहम'
तब मिरी प्यास को समझेगा ज़माना शायद