उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijr lazim hai to ye hijr nibhae jao

हिज्र लाज़िम है तो ये हिज्र निभाए जाओ

ہجر لازم ہے تو یہ ہجر نبھائے جاؤ

शायर: Maaham Shah6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिज्र लाज़िम है तो ये हिज्र निभाए जाओ
जा रहे हो तो कोई रब्त बनाए जाओ

जो भी इस दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहो
कैसे मुमकिन है किताबो से भुलाए जाओ

शायद ये तर्ज़ किसी रूह में घर कर जाए
ऐन मुमकिन है किसी दिल में बसाए जाओ

ये मिरी रात भी उम्मीद लगाए हुए है
उस के दामन से कोई सुब्ह लगाए जाओ

गुफ़्तुगू करते अगर साथ में होते कुछ देर
जाते जाते मुझे इक शेर सुनाए जाओ

मेरी तख़्लीक़ को आवाज़ बना दो 'माहम'
मेरी तहरीर की ख़ामोशी मिटाए जाओ