उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na ye badla na wo badla na ye dil ka jahan badla

न ये बदला न वो बदला न ये दिल का जहाँ बदला

نہ یہ بدلا نہ وہ بدلا نہ یہ دل کا جہاں بدلا

शायर: Kaleem Jazil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न ये बदला न वो बदला न ये दिल का जहाँ बदला
अगर बदला यहाँ कुछ तो फ़क़त वो मेहरबाँ बदला

तुम्हें भी चैन की नींदें यहाँ सोने नहीं देंगी
अगर अज्दाद का तुम ने ज़रा सा भी निशाँ बदला

ज़माने में बहुत आया तग़य्युर दोस्तो लेकिन
ज़मीं जैसी की तैसी है न रंग-ए-आसमाँ बदला

अभी तक लोग क़ाएम हैं उन्हीं झूटी रिवायत पर
तुम्हारी हक़-बयानी से कोई आख़िर कहाँ बदला

हमेशा जिस के होंटों पर मोहब्बत की रहीं बातें
ख़ुदा जाने कि क्यों उस का है अंदाज़-ए-बयाँ बदला

क़दम आगे बढ़ाता ही रहा मैं सख़्त राहों पर
न हिम्मत ही मिरी टूटी न ये अज़्म-ए-जवाँ बदला

है उन को आज भी 'जाज़िल' वफ़ादारी पे शक लेकिन
न हम ने शाख़-ए-गुल छोड़ी न हम ने आशियाँ बदला