उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman ki tazgi phulon ki dil-kashi le kar

चमन की ताज़गी फूलों की दिल-कशी ले कर

چمن کی تازگی پھولوں کی دلکشی لے کر

शायर: Kaleem Jazil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन की ताज़गी फूलों की दिल-कशी ले कर
तिरे दयार में आया हूँ ज़िंदगी ले कर

जो कर रहा है इकट्ठा मता-ए-हस्ती तो
वहाँ न जाएगा सुन ले तू एक भी ले कर

रगों में दौड़ रही है सियाही नफ़रत की
चले भी आओ मोहब्बत की रौशनी ले कर

नवाज़ देंगे तो एहसान आप का होगा
मैं टूटी फूटी यहाँ आया शायरी ले कर

ज़माना देखने लगता है शक की नज़रों से
कोई निकलता नहीं लब पे अब हँसी ले कर

किसी से कुछ नहीं कहता है अपने दिल की बात
भटक रहा है वो होंटों पे ख़ामुशी ले कर

अंधेरे पाँव पसारेंगे किस तरह 'जाज़िल'
मोहब्बतों की मैं निकला हूँ चाँदनी ले कर