उर्दू शायरी · ग़ज़ल

masti-bhari wo sham suhani uTha ke la

मस्ती-भरी वो शाम सुहानी उठा के ला

مستی بھری وہ شام سہانی اٹھا کے لا

शायर: Kaleem Jazil6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मस्ती-भरी वो शाम सुहानी उठा के ला
जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला

दिल की उमंग वस्ल की ख़ुशबू के वास्ते
बाग़-ए-वफ़ा से रात की रानी उठा के ला

बातिल से तुझ को मा'रका करना है गर यहाँ
छोड़ी हुई सलफ़ की निशानी उठा के ला

ऐ बुलबुल-ए-चमन तुझे शोहरत जो चाहिए
जा उस के लब की शोख़-बयानी उठा के ला

दीवार-ए-दिल की शान बढ़ाने के वास्ते
तस्वीर उस की कोई पुरानी उठा के ला

महफ़िल में होंगी तेरी पज़ीराइयाँ बहुत
'जाज़िल' तू अपनी गुज़री कहानी उठा के ला