उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon mein intizar ki ghaDiyan liye hue

आँखों में इंतिज़ार की घड़ियाँ लिए हुए

آنکھوں میں انتظار کی گھڑیاں لیے ہوئے

शायर: Kaleem Jazil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों में इंतिज़ार की घड़ियाँ लिए हुए
बैठा हूँ दिल में कितने ही अरमाँ लिए हुए

पल-भर में फूट सकता है जज़्बों का इक हुजूम
आग़ोश में हुबाब है तूफ़ाँ लिए हुए

हसरत-भरी निगाह से बस देखता रहा
निकलीं जब उस को साथ में सखियाँ लिए हुए

माना कि मेरी ज़िंदगी मुश्किल में है मगर
चलता हूँ फिर भी ख़ुशियों का सामाँ लिए हुए

'जाज़िल' बहुत ही नाज़ था जब इश्क़ पर तुझे
क्यों फिर रहा है चाक गरेबाँ लिए हुए