उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na qumqume na sitare na sang chahti hai

न क़ुमक़ुमे न सितारे न संग चाहती है

نہ قمقمے نہ ستارے نہ سنگ چاہتی ہے

शायर: Lucky farooqi Hasrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न क़ुमक़ुमे न सितारे न संग चाहती है
ग़ज़ल की माँग तख़य्युल का रंग चाहती है

हैं अंधी क़ब्र की गुम-नामियाँ त'आक़ुब में
मगर ये ख़ाक-ए-बदन नाम-ओ-नंग चाहती है

किसी फ़क़ीर का हुजरा है ज़िंदगी शायद
ये क़ा'एदा न सलीक़ा न ढंग चाहती है

ब-नाम-ए-अम्न बनाई गई थी ये दुनिया
मगर ये ख़ल्क़-ए-ख़ुदा सिर्फ़ जंग चाहती है

मुहक़्क़िक़ीन का क्या काम इस ख़राबे में
खंडर में ऊँघती वहशत मलंग चाहती है