उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na puchh humse hamari uDan chhoD na yar

न पूछ हम से हमारी उड़ान छोड़ न यार

نہ پوچھ ہم سے ہماری اڑان چھوڑ نہ یار

शायर: Chand Akbarabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न पूछ हम से हमारी उड़ान छोड़ न यार
बड़ी तवील है ये दास्तान छोड़ न यार

निकल पड़े जो सफ़र में तो सोचना कैसा
कहाँ है धूप कहाँ साएबान छोड़ न यार

दबी है आग जो दिल में उसे कुरेदो मत
यहीं कहीं था हमारा मकान छोड़ न यार

ये सोच हम को पहुँचना है अपनी मंज़िल तक
न गिन किसी के क़दम के निशान छोड़ न यार

ख़ुशी थी मूल तो ग़म था बियाज के जैसा
तमाम 'उम्र भरा है लगान छोड़ न यार

हुआ है ज़िंदगी भर की जुगाड़ रोटी का
बिकी है क़िस्तों में अपनी दुकान छोड़ न यार

ये सब बुलंदियाँ अल्लाह के लिए हैं 'चाँद'
मक़ाम मर्तबा रुत्बा ये शान छोड़ न यार