उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na mulla hun na mufti hun na waiz hun na qazi hun

न मुल्ला हूँ न मुफ़्ती हूँ न वाइज़ हूँ न क़ाज़ी हूँ

نہ ملا ہوں نہ مفتی ہوں نہ واعظ ہوں نہ قاضی ہوں

शायर: Maatam Fazl Mohammad4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न मुल्ला हूँ न मुफ़्ती हूँ न वाइज़ हूँ न क़ाज़ी हूँ
गुनहगार ओ ख़ता-कार ओ रज़ा-ए-हक़ पे राज़ी हूँ

जहाँ से हूँ यहाँ आया वहाँ जाऊँगा आख़िर को
मिरा ये हाल है यारो न मुस्तक़बिल न माज़ी हूँ

मैं हूँ नादान दूर-उफ़्तादा दानाई के दीवाँ से
न सानी हूँ सहाबी का न हम-बज़्म-ए-बयाज़ी हूँ

परेशाँ दिल हूँ मैं तंहाई से 'मातम' ज़माने में
न हम-दाैरान-ए-फ़ैज़ी हूँ न हम-अस्र-ए-फ़याज़ी हूँ