उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na kyon apni mohabbat ko hi be-lafz-o-bayan kar len

न क्यों अपनी मोहब्बत को ही बे-लफ़्ज़-ओ-बयाँ कर लें

نہ کیوں اپنی محبت کو ہی بے لفظ و بیاں کر لیں

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न क्यों अपनी मोहब्बत को ही बे-लफ़्ज़-ओ-बयाँ कर लें
ख़मोशी को ज़बाँ कर लें नज़र को दास्ताँ कर लें

हसीं है हुस्न से तेरे ये पस्ती भी बुलंदी भी
न क्यों फिर तुझ को सज्दे हम जहाँ चाहें वहाँ कर लें

तबस्सुम को लब-ए-लाली पे अपने कुछ बिखरने दो
दिल-ए-वीराँ को दम भर हम भी रक़्स-ए-गुलसिताँ कर लें

यही मौसम यही दिन थे कि हम से क़ाफ़िला छूटा
मोहब्बत से हम इक बार और याद-ए-कारवाँ कर लें

शिकस्ता पर हैं पहुँचे किस तरह उजड़े नशेमन में
ब-सद-हसरत निगाहें क्यों न सू-ए-आशियाँ कर लें

निगाहें देखें साक़ी की कि उस के हाथ में साग़र
ज़रा ज़ौक़-ए-नज़र का आज हम भी इंतिहा कर लें

'हबीब' इस ज़िंदगी में ये बदी बद-सूरती कैसी
हसीं हम क्यों न हुस्न-ए-यार से अपना जहाँ कर लें