उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na chamki us badan ki dhup dam bhar

न चमकी उस बदन की धूप दम भर

نہ چمکی اس بدن کی دھوپ دم بھر

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न चमकी उस बदन की धूप दम भर
रगों में जम गया सारा दिसम्बर

मियाँ दौरे पे जाएँ या न जाएँ
करो मिल बैठने को कुछ अडम्बर

कहा किस का तू आख़िर मानती है
कोई है भी तिरा पीर-ओ-पयम्बर

नशे में भाई फेरू आन पहुँचे
हमें वैसे उतर जाना था जमबर

उसे भी खींच कर बाहर निकालो
छुपा है मौलवी भी ज़ेर-ए-मिंबर

सरों पर टूट कर गिरता नहीं क्यों
हमारा आसमाँ भारत का अंबर

मरा बैठा हूँ देखें कब निकालें
सवेरा का 'ज़फ़र'-इक़बाल नंबर