उर्दू शायरी · ग़ज़ल

munh mein apne zaban chahte hain

मुँह में अपने ज़बान चाहते हैं

منہ میں اپنے زبان چاہتے ہیں

शायर: Parvez Muzaffar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुँह में अपने ज़बान चाहते हैं
वो बनारस का पान चाहते हैं

जान जिन पे निसार की हम ने
वो हमारी ही जान चाहते हैं

वो जिन्हों ने ज़मीन गिरवी की
अब वो हम से लगान चाहते हैं

हम कि अपनी ज़मीन से कट कर
घर में हिन्दोस्तान चाहते हैं

'उम्र भर टैक्सी चलाई है
सूट में झूटी शान चाहते हैं

रोटियाँ घर की छोड़ कर 'परवेज़'
क़ोरमा और नान चाहते हैं