उर्दू शायरी · ग़ज़ल

munh khol ke dil ki baat kahi kab un se pareshan-haalon ne

मुँह खोल के दिल की बात कही कब उन से परेशाँ-हालों ने

منہ کھول کے دل کی بات کہی کب ان سے پریشاں حالوں نے

शायर: Ijtiba Rizvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुँह खोल के दिल की बात कही कब उन से परेशाँ-हालों ने
हाँ आधी आधी रात गए जा जा के सताया नालों ने

अब सब की ज़बाँ से सुन लीजे ख़ल्वत का बयाँ जल्वत का बयाँ
उफ़ क्या क्या राज़ न फ़ाश किए आग़ोश-ए-जुनूँ के पालों ने

इस दिल को राह-ए-मोहब्बत में जिस जिस ने पाया लूट लिया
इक तुम ही नहीं सब ने ये किया ख़ारों ने गुलों ने लालों ने

आँखों पे लटों का झुक आना तासीर-ए-नज़र का बढ़ जाना
अमृत के कटोरों में आख़िर कुछ ज़हर मिलाया कालों ने

फ़रहाद गया मजनूँ न रहा इक 'रिज़वी' है अल्लाह रखे
कुछ बात वफ़ा की रख ली है इन चंद परेशाँ-हालों ने