उर्दू शायरी · ग़ज़ल

munh dekhe ki baaten sari wade rangin KHwab sunahre

मुँह देखे की बातें सारी वा'दे रंगीं ख़्वाब सुनहरे

منہ دیکھے کی باتیں ساری وعدے رنگیں خواب سنہرے

शायर: Kailash Mahir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुँह देखे की बातें सारी वा'दे रंगीं ख़्वाब सुनहरे
दिल्ली जा कर भूल न जाना फूल-बदन ये चाँद से चेहरे

तुम को तो अपना समझा था तुम सब से बेगाने ठहरे
तुम ने दिल में झाँका होता कितने ज़ख़्म हैं कितने गहरे

लाख पुजारी दीप जलाएँ ख़ूँ टपकाएँ जी से जाएँ
बुत-ख़ाने में रीत सदा की सारे सनम ही गूँगे बहरे

बीता हुआ हर लम्हा मुझ से अपनी क़ीमत माँग रहा है
कैसी भयानक तन्हाई है चारों तरफ़ हैं हँसते चेहरे

अपनी ही सूरत देख के 'माहिर' पहरों पहरों रोए भी हम
किस को अपना मीत बनाते लोग तिजारत-पेशा ठहरे