उर्दू शायरी · ग़ज़ल

muKhaalifat wo bhi yar mera karega meri

मुख़ालिफ़त वो भी यार मेरा करेगा मेरी

مخالفت وہ بھی یار میرا کرے گا میری

शायर: Tahir Saood Kiratpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुख़ालिफ़त वो भी यार मेरा करेगा मेरी
वो दुश्मनी तक में बेवक़ूफ़ों कहेगा मेरी

मिरी नज़र में वो उस की नक़्शा-गरी करेगा
अगर मुअर्रिख़ हयात पे कुछ लिखेगा मेरी

उधर वो ख़ुद भी जहाँ से रिश्ते को तोड़ देगा
इधर ख़बर फेसबुक पे जैसे पढ़ेगा मेरी

जनाब-ए-ग़म-ख़्वार बीच रस्ते न छोड़ जाना
उदास रातों में कौन चीख़ें सुनेगा मेरी

ग़िलाफ़-ए-का'बा पकड़ के माँगा है उस को मैं ने
वो इक न इक दिन ज़रूर क़िस्मत बनेगा मेरी

वो फ़िल्म तक में जुदाई का सीन काटता है
तो कैसे फिर वो जुदाई आख़िर सहेगा मेरी