उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhe aamajgah-e-nawak-e-bedad rahne de

मुझे आमाजगाह-ए-नावक-ए-बेदाद रहने दे

مجھے آماجگاہ ناوک بیداد رہنے دے

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझे आमाजगाह-ए-नावक-ए-बेदाद रहने दे
जो इस का नाम बर्बादी है तो बर्बाद रहने दे

सरिश्त-ए-इश्क़ लज़्ज़त-आश्ना-ए-तल्ख़-कामी है
मैं नाशाद-ए-तमन्ना हूँ मुझे नाशाद रहने दे

नहीं जब सुब्हा-ओ-ज़ुन्नार के फंदे में गीराई
मुझे दैर-ओ-हरम के दाम से आज़ाद रहने दे

अभी से क्यों बनी जाती है चश्म-ए-नाज़ बेगाना
फ़रेब-ए-आरज़ू कुछ दिन सितम-ईजाद रहने दे

किया है किन उमीदों पर फ़राहम आशियाँ मैं ने
ख़ुदारा मौसम-ए-गुल तक मिरे सय्याद रहने दे

हमें आज़ादी-ए-फ़िक्र-ओ-नज़र का इद्दआ तो है
कोई ग़ारत-गर-ए-ईमाँ अगर आज़ाद रहने दे

दिल-ए-बर्बाद से ये चश्मक-ए-चश्म-ए-तरब क्यों है
करम-ना-आश्ना को ख़ूगर-ए-बेदाद रहने दे