उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhse mil kar KHud ko kya paega tu

मुझ से मिल कर ख़ुद को क्या पाएगा तू

مجھ سے مل کر خود کو کیا پائے گا تو

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ से मिल कर ख़ुद को क्या पाएगा तू
और तन्हा हो के रह जाएगा तू

ये ठिठुरती धूप है इस धूप में
कैसे अपना ख़ून गर्माएगा तू

हड्डियों का दर्द पीना है तो पी
वर्ना सारी उम्र पछताएगा तू

साँप के बिल में न कर अमृत तलाश
यूँ तो ख़ुद को भी गँवा आएगा तू

तेरी परछाईं सिमटती जाएगी
जैसे जैसे फैलता जाएगा तू

तेरा पत्थर जिस्म हो जाएगा चूर
जब किसी शीशे से टकराएगा तू

यूँ न घोंट उन संग-रेज़ो के गले
ख़ुद शिकार-ए-संग हो जाएगा तू