उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohtasib se hui dam bhar bhi jo mahfil Khaali

मोहतसिब से हुई दम भर भी जो महफ़िल ख़ाली

محتسب سے ہوئی دم بھر بھی جو محفل خالی

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहतसिब से हुई दम भर भी जो महफ़िल ख़ाली
जी मिरा जाम का शीशे का हुआ दिल ख़ाली

हिम्मत-ए-पीर-ए-मुग़ाँ देख ले ज़ाहिद चल कर
कोई मय-ख़ाने से फिरता नहीं साइल ख़ाली

सीना ज़ख़्मी है जिगर चूर है दिल घायल है
वार-ए-नेज़ा कोई जाता नहीं क़ातिल ख़ाली

अहद-ए-पीरी में रवाना हुए यूँ होश-ओ-हवस
सुब्ह को जैसे मुसाफ़िर से हो मंज़िल ख़ाली