उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat mein jina nai baat hai

मोहब्बत में जीना नई बात है

محبت میں جینا نئی بات ہے

शायर: Saail Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत में जीना नई बात है
न मरना भी मर कर करामात है

मैं रुस्वा-ए-उल्फ़त वो मारूफ़-ए-हुस्न
बहम शोहरतों में मुसावात है

न शाहिद न मय है न बज़्म-ए-तरब
ये ख़मियाज़ा-ए-तर्क-ए-आदात है

शब ओ रोज़ फ़ुर्क़त हमारा हर एक
अजल का है दिन मौत की रात है

उड़ी है मय-ए-मुफ़्त 'साइल' मुदाम
कि साक़ी से गहरी मुलाक़ात है