उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ke jaziron mein daraDen aa gai hain

मोहब्बत के जज़ीरों में दराड़ें आ गई हैं

محبت کے جزیروں میں دراڑیں آ گئی ہیں

शायर: Yasir Guman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत के जज़ीरों में दराड़ें आ गई हैं
ज़मीन-ए-दिल की राहों में दराड़ें आ गई हैं

'इमारत टूट कर गिरने ही वाली है ग़ज़ल की
सुख़न-साज़ों के मिसरों में दराड़ें आ गई हैं

हसद के एक दम उठते हुए तूफ़ाँ के बा'इस
ज़मीं वालों के रिश्तों में दराड़ें आ गई हैं

हुए जब फ़िक्र में शामिल कई ग़ैरों की बातें
नई नस्लों की सोचों में दराड़ें आ गई हैं

गुमान-ए-ख़ुशनुमा इस वास्ते अच्छा लगा है
यक़ीं वालों की बातों में दराड़ें आ गई हैं