उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miTe hain ishq mein aise ki kaun jaane hai

मिटे हैं 'इश्क़ में ऐसे कि कौन जाने है

مٹے ہیں عشق میں ایسے کہ کون جانے ہے (ردیف .. ن)

शायर: Nabil Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिटे हैं 'इश्क़ में ऐसे कि कौन जाने है
ज़मीं से पूछ फ़लक से कि अब कहाँ हूँ मैं

चराग़ अब भी हूँ लेकिन बुझा हुआ कब से
मैं रौशनी था कभी अब तो बस धुआँ हूँ मैं

मिरी तलाश में दुनिया ने क्या कमाल किया
कि पूछ डाला है शीशे से अब कहाँ हूँ मैं

कभी मैं याद में था तेरी मैं दु'आ में था
अभी मैं साथ हूँ तेरे मगर निहाँ हूँ मैं

अगरचे है भी तू हक़दार तो ग़ुरूर न कर
जो झुक गया है ज़मीं पर वो आसमाँ हूँ मैं