उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri wafa ka na socha tha ye sila dega

मिरी वफ़ा का न सोचा था ये सिला देगा

مری وفا کا نہ سوچا تھا یہ صلہ دے گا

शायर: Hafeez Betab6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी वफ़ा का न सोचा था ये सिला देगा
समझ के हर्फ़-ए-ग़लत वो मुझे मिटा देगा

भला वो देगा भी मुझ को तो और क्या देगा
ग़मों की धूप में जीने की बस सज़ा देगा

अजीब ज़िद है कि उल्टा ही सोचता है वो
मैं सच कहूँगा उसे झूट वो बना देगा

सितम का उस के कुछ अंदाज़ ही निराला है
जो मौत चाहूँगा जीने की वो दुआ देगा

ये सोचता हूँ उसे आइना दिखा ही दूँ
बहुत करेगा भरी बज़्म से उठा देगा

मैं छोड़ दूँ उसे 'बेताब' किस तरह आख़िर
क़दम क़दम पे मिरा घर मुझे सदा देगा