उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lafz-o-mani ki ye sab jhuTi numaish chhoD de

लफ़्ज़-ओ-मा'नी की ये सब झूटी नुमाइश छोड़ दे

لفظ و معنی کی یہ سب جھوٹی نمائش چھوڑ دے

शायर: Hafeez Betab6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लफ़्ज़-ओ-मा'नी की ये सब झूटी नुमाइश छोड़ दे
यूँ हमा-दानी की नादाँ अपनी ख़्वाहिश छोड़ दे

ज़द पे आ जाएगा तेरा आइना भी याद रख
आइनों पे संग बरसाने की कोशिश छोड़ दे

आग जब भड़केगी कोई घर न बच पाएगा फिर
दूसरों का घर जलाने की ये साज़िश छोड़ दे

बन न जाए वज्ह-ए-रुस्वाई ये तेरी एक दिन
अपने मुँह से अपनी ही करना सताइश छोड़ दे

कोई दीवार-ए-अना क़ाएम रहे क्यों दरमियाँ
जो दिलों को दूर कर दे ऐसी रंजिश छोड़ दे

जो सरायत कर गया 'बेताब' रग रग में तिरी
उस की यादों को भुलाने की ये काविश छोड़ दे