उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHayal-o-KHwab ki zulfen sanwar thoDi der

ख़याल-ओ-ख़्वाब की ज़ुल्फ़ें सँवार थोड़ी देर

خیال و خواب کی زلفیں سنوار تھوڑی دیر

शायर: Hafeez Betab6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़याल-ओ-ख़्वाब की ज़ुल्फ़ें सँवार थोड़ी देर
अभी है और शब-ए-इंतिज़ार थोड़ी देर

मोहब्बतों के ये पैकर ये दोस्ती के अमीन
वफ़ा के होते हैं सब पासदार थोड़ी देर

अभी न रोकिए इन आंसुओं को पलकों पर
निकलने दीजिए दिल का ग़ुबार थोड़ी देर

तमाम उम्र रहा उस का इंतिज़ार मुझे
जो कह गया था करो इंतिज़ार थोड़ी देर

बना रहूँ मैं तमाशा-ए-आरज़ू कब तक
अज़ाब मुझ पे ख़ुदाया उतार थोड़ी देर

ज़रूर पिघलेंगी यख़-बस्ता वादियाँ 'बेताब'
रुके तो धूप सर-ए-कोहसार थोड़ी देर